Padam sadhna

‘पद्मसाधना’ एक सुन्दर योग मुद्राओं की शृंखला है, जिससे आप का स्वयं प्रेम और आनंद से खिल उठेगा!!!!~ श्री श्री रविशंकर

‘पद्म’ का अर्थ होता है कमल और साधना का अर्थ आपका‘प्रयास’| इसलिये इस अभ्यास को कमल के हलकेपन के जैसे बिना प्रयास के किया जाना चाहिए| साधना आसनपर बैठने के लिए एक सहज उपाय के जैसा है और कमल आपकी प्रतिभाओं को परत दर परत निखारने के जैसा| पद्मसाधना में आप योग मुद्राओं के द्वारा भीतर से खिल जायेंगे| आध्यात्मिक पथ पर प्रगति के लिए साधक को सही दिशा की आवश्यकता होती है| योग साधक के अभ्यास को गहन करने लिए लिए एक अमूल्य शस्त्र है “पद्मसाधना”|

'अगमा’ परंपरा में, देवी की गद्दी पाँच परतों से बनी हुई है,प्रत्येक परत हमारी साधना (योग अभ्यास) के एक पहलू का प्रतिनिधित्व करती है| पहली परत है कछुआ, जो स्थिरता का प्रतीक है| आसन के दौरान कछुए की तरह आसन को स्थिर रखें| दूसरी परत है सांप, जो सजगता का प्रतीक है| सजगता के बिना स्थिरता सुस्ती लाती है| इसलिए स्थिर रहें और साथ में सजग भी|तीसरी परत है सिंह| यह कृपा का प्रतीक है जिसे दो भागों में समझा जा सकता है| पहला शाही पहलू है; सिंह जो कुछ भी करता है उसमें वह प्रतापी होता है| दूसरा पहलू यह है कि सिंह उतना ही करता है जितना आवश्यक हो, वह शिकार करता है और फिर जब तक आवश्यक हो तब तक विश्राम करता है| यह कृपा की पहचान है| पद्मसाधना में बहुत ज्यादा प्रयास नहीं करें| जितना आवश्यक हो उतना ही करें|

चौथी परत है सिद्धि या उत्तमता| अपनी मुद्राओं को सिद्ध या उत्तम करें| जैसा आप नियमित रूप से अभ्यास करते हैं तो मुद्रा में उत्तमता या सिद्धि प्राप्त होती है| जिसका तात्पर्य है शारीरिक रूप से सही मुद्रा और मानसिक रूप से शांत मन| पांचवी परत है कमल; पूरी तरह से खिली हुई स्थिति और इस पर देवी बैठी है| दिव्यता, चेतना में निहित है, और इन पाँच पहलुओं की गद्दी पर बैठती है|आध्यात्मिक प्रगति करने के लिए साधक पद्मसाधना के इन पांच पहलुओं का विकास और अपने अभ्यास को गहन कर सकते हैं|

पद्मसाधना योग आसन, प्राणायाम और ध्यान की एक सुंदर शृंखला है, जिससे साधक अपने अभ्यास में गहन हो सकता है|आसन मुद्राएँ शरीर और मन को केंद्रित करते हैं और प्राणायाम तंत्र को उर्जायुक्त और शांत करता है, जिससे कोई गहन ध्यान में जा सके|

प्रश्न : पद्मसाधना का अभ्यास कैसे करें?
श्री श्री रविशंकर :प्रवाह के साथ चलें| पद्मसाधना में मुद्रा दर मुद्रा एक सुंदर प्रवाह के जैसे है| इसमें ऐसा लगता है जैसे पूरा अनुक्रम एक प्रक्रिया है; आसन, प्राणायाम, ध्यान सब एक में समाये हुए हैं| इस प्रक्रिया की प्रकृति ध्यानयुक्त होती है,इसलिए यह सबसे उत्तम होगा कि इसे सुदर्शन क्रिया करने से पूर्व किया जाये| योग आसान को धीरे धीरे करें जैसे यह भी एक ध्यान हो!उज्जई श्वास लें| आप योग आसान में उज्जई श्वास का उपयोग करें| इससे आप किसी मुद्रा में अधिक समय तक बने रह सकते हैं| हर आसान मे ३-४ श्वास लेने की अनुशंसा की जाती है|उज्जई श्वास को सौम्य रखना सबसे उत्तम है, और इसके लिए अधिक प्रयास करने की आवश्कता नहीं है|

समयबध्द रहें| यह पूरी शृंखला ४० मिनिट तक चलती है| १० मिनिट आसन, ५ मिनिट प्राणायाम, २० मिनिट ध्यान और ५ मिनिट प्राणायाम| इस क्रम में समयबध्द रहना सबसे उत्तम है|आसन में विश्राम करें| हर एक आसन में एक मुद्रा में ३०-४० सेकंड तक रहें| यदि आप उज्जई श्वास ले रहे हैं तो उसका अर्थ है कि ३-४ उज्जई श्वास| आपइसका प्रयोग करते हुए निर्णय ले सकते हैं कि आपको एक मुद्रा मे कितनी श्वास लेनी है, जिससे आप यह पूरी आसन की शृंखला को १० मिनिट में समाप्त कर सकें|

“स्थिरं सुखं आसनं”| आसन मे सौम्य और ध्यानयुक्त होना है इसे याद रखें| योग आसन का उद्देश्य किसी भी चिंता को मुक्त करना होता है, जिससे शरीर ध्यान के लिए तैयार हो सके|महर्षि पातंजलि अपने योग सूत्र में कहते हैं "स्थिरं सुखं आसनं" स्थिरं का अर्थ है स्थिरता| सुखं का अर्थ है आनंद| महर्षि पातंजलि कहते हैं कि आसन मे स्थिर बने रहें और आसन का आनंद लेते हुए मुस्कुराते हुए योग करें|प्राणायाम पर केंद्रित रहें|

पद्मसाधना के दौरान नाड़ी शोधन प्राणायाम करें| नाड़ी शोधन प्राणायाम नाड़ीयों का संतुलन बनाने मे सहायक है जिससे यह ध्यान में जाने और उसमे से निकलने का आसान उपाय सिद्ध होता है|सरलता से ध्यान में जाएँ|पद्मसाधना के दौरान हम 'सहज समाधि' ध्यान का उपयोग करते हैं| पद्मसाधना को अपनी प्रातःकाल और सायंकाल की योग साधना का अनिवार्य हिस्सा बनाएं।

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Yoga for cold.

Ten yoga poses that helps you in treating cold.

Sun salutation.

Surya namaskar contains 12 yoga poses and it is complete exercise in itself. In some browser, you may not able to see gif. 

One round of Sun Salutation consists of 12 yoga poses.One set consists of two rounds of Sun Salutation: first stretching the right side of your body and then the left side.

Surya Namaskar calorie calculation:One round of Surya Namaskar burns upto 13.90 calories for an average weighing person.You can now set the target for yourself. Slowly you can increase the number of rounds of surya namaskar to 108. By the time you reach this number, you will find a leaner you.

30-minutes workout calorie meter. How  much calories are you burning in your 30 minute workout?

Weight lifting = 199 calories

Tennis = 232 calories

Basketball = 265 calories

Beach volleyball = 265 calories

Football = 298 calories

Bicycling (14 – 15.9 mph) = 331 calories

Rock climbing = 364 calories

Running (7.5mph) = 414 calories

Surya Namaskar = 417 calories

Yoga for neck pain.

Different yoga poses for neck pain.

Kapal bharti benefits.

Lots of benefits are there of Kapal bharti. It must be done only with empty stomach. And it's better to increase its rounds gradually with in between breaks.

Yoga poses for weight reduction

Weight reduction poses in Yoga. As usual one should warm up before doing any intense exercise or yoga.

Better posture by Yoga.

Yoga poses for better posture, that you can do anytime with empty stomach.

How different utensils effects food.

For English, you may take help of Google translate.
आइये जानते है कौन सी धातु के बर्तन में भोजन करने से क्या क्या लाभ और हानि होती है....

*सोना
☄सोना एक गर्म धातु है। सोने से बने पात्र में भोजन बनाने और करने से शरीर के आन्तरिक और बाहरी दोनों हिस्से कठोर, बलवान, ताकतवर और मजबूत बनते है और साथ साथ सोना आँखों की रौशनी बढ़ता है।

*चाँदी
☄चाँदी एक ठंडी धातु है, जो शरीर को आंतरिक ठंडक पहुंचाती है। शरीर को शांत रखती है  इसके पात्र में भोजन बनाने और करने से दिमाग तेज होता है, आँखों स्वस्थ रहती है, आँखों की रौशनी बढती है और इसके अलावा पित्तदोष, कफ और वायुदोष को नियंत्रित रहता है।

*कांसा
☄काँसे के बर्तन में खाना खाने से बुद्धि तेज होती है, रक्त में  शुद्धता आती है, रक्तपित शांत रहता है और भूख बढ़ाती है। लेकिन काँसे के बर्तन में खट्टी चीजे नहीं परोसनी चाहिए खट्टी चीजे इस धातु से क्रिया करके विषैली हो जाती है जो नुकसान देती है। कांसे के बर्तन में खाना बनाने से केवल 3 प्रतिशत ही पोषक तत्व नष्ट होते हैं।

*तांबा
☄तांबे के बर्तन में रखा पानी पीने से व्यक्ति रोग मुक्त बनता है, रक्त शुद्ध होता है, स्मरण-शक्ति अच्छी होती है, लीवर संबंधी समस्या दूर होती है, तांबे का पानी शरीर के विषैले तत्वों को खत्म कर देता है इसलिए इस पात्र में रखा पानी स्वास्थ्य के लिए उत्तम होता है. तांबे के बर्तन में दूध नहीं पीना चाहिए इससे शरीर को नुकसान होता है।

*पीतल
☄पीतल के बर्तन में भोजन पकाने और करने से कृमि रोग, कफ और वायुदोष की बीमारी नहीं होती। पीतल के बर्तन में खाना बनाने से केवल 7 प्रतिशत पोषक तत्व नष्ट होते हैं।

*लोहा
☄लोहे के बर्तन में बने भोजन खाने से  शरीर  की  शक्ति बढती है, लोह्तत्व शरीर में जरूरी पोषक तत्वों को बढ़ता है। लोहा कई रोग को खत्म करता है, पांडू रोग मिटाता है, शरीर में सूजन और  पीलापन नहीं आने देता, कामला रोग को खत्म करता है, और पीलिया रोग को दूर रखता है. लेकिन लोहे के बर्तन में खाना नहीं खाना चाहिए क्योंकि इसमें खाना खाने से बुद्धि कम होती है और दिमाग का नाश होता है। लोहे के पात्र में दूध पीना अच्छा होता है।

*स्टील
☄स्टील के बर्तन नुक्सान दायक नहीं होते क्योंकि ये ना ही गर्म से क्रिया करते है और ना ही अम्ल से. इसलिए नुक्सान नहीं होता है. इसमें खाना बनाने और खाने से शरीर को कोई फायदा नहीं पहुँचता तो नुक्सान भी  नहीं पहुँचता।

*एलुमिनियम
☄एल्युमिनिय बोक्साईट का बना होता है। इसमें बने खाने से शरीर को सिर्फ नुक्सान होता है। यह आयरन और कैल्शियम को सोखता है इसलिए इससे बने पात्र का उपयोग नहीं करना चाहिए। इससे हड्डियां कमजोर होती है. मानसिक बीमारियाँ होती है, लीवर और नर्वस सिस्टम को क्षति पहुंचती है। उसके साथ साथ किडनी फेल होना, टी बी, अस्थमा, दमा, बात रोग, शुगर जैसी गंभीर बीमारियाँ होती है। एलुमिनियम के प्रेशर कूकर से खाना बनाने से 87 प्रतिशत पोषक तत्व खत्म हो जाते हैं।

*मिट्टी
☄मिट्टी के बर्तनों में खाना पकाने से ऐसे पोषक तत्व मिलते हैं, जो हर बीमारी को शरीर से दूर रखते थे। इस बात को अब आधुनिक विज्ञान भी साबित कर चुका है कि मिट्टी के बर्तनों में खाना बनाने से शरीर के कई तरह के रोग ठीक होते हैं। आयुर्वेद के अनुसार, अगर भोजन को पौष्टिक और स्वादिष्ट बनाना है तो उसे धीरे-धीरे ही पकना चाहिए। भले ही मिट्टी के बर्तनों में खाना बनने में वक़्त थोड़ा ज्यादा लगता है, लेकिन इससे सेहत को पूरा लाभ मिलता है। दूध और दूध से बने उत्पादों के लिए सबसे उपयुक्त हैमिट्टी के बर्तन। मिट्टी के बर्तन में खाना बनाने से पूरे 100 प्रतिशत पोषक तत्व मिलते हैं। और यदि मिट्टी के बर्तन में खाना खाया जाए तो उसका अलग से स्वाद भी आता है।
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पानी पीने के पात्र के विषय में 'भावप्रकाश ग्रंथ' में लिखा है...
जलपात्रं तु ताम्रस्य तदभावे मृदो हितम्।
पवित्रं शीतलं पात्रं रचितं स्फटिकेन यत्।
काचेन रचितं तद्वत् वैङूर्यसम्भवम्।
(भावप्रकाश, पूर्वखंडः4)
अर्थात् पानी पीने के लिए ताँबा, स्फटिक अथवा काँच-पात्र का उपयोग करना चाहिए। सम्भव हो तो वैङूर्यरत्नजड़ित पात्र का उपयोग करें। इनके अभाव में मिट्टी के जलपात्र पवित्र व शीतल होते हैं। टूटे-फूटे बर्तन से अथवा अंजलि से पानी नहीं पीना चाहिए।

Yoga in Hindi

योग अपनी साँसों पर ध्यान देते हुए विभिन्न मुद्राओं में रहने की कला है| परिणामस्वरूप प्रत्येक योगासन का हमारे स्वसन तन्त्र पर विशेष प्रभाव पड़ता है,जिससे हमारा हृदय भी प्रभावित होता है।

निम्नलिखित आसनों के क्रम में हलकी मुद्राओं से शुरुआत करते हुए धीरे धीरे उन आसनों की तरफ आगे बढ़ेंगे जिनमें अधिक सामर्थ्य व् शक्ति की जरुरत होगी।आखिरी मुद्राओं के साथ शरीर शांत व् स्फूर्तिवान हो जाता है।

1. ताड़ासन |Tadasana
ताड़ासन ह्रदय को मजबूती देता है और शरीर में लचीलेपन को बढ़ाता है।

2. वृक्षासन |Vrikshasana
वृक्षासन मन को शांत व् संतुलित करता है ।शांत मन के लिए यह मुद्रा लाभदायक है| इससे ह्रदय की कार्य प्रणाली बेहतर होती है।

3.ऊथिताहस्तपादासन|Utthita Hastapadasana
इस मुद्रा में संतुलन बनाए रखने के लिए अधिक ध्यान व् शक्ति की जरुरत होती है।

4. त्रिकोणासन|Trikonasana
यह खड़े रहकर की जाने वाली ह्रदय को खोलने वाली मुद्रा है।यह मुद्रा हृदयवाहिनी तन्त्र को लाभ पहुँचाती है। गहरी साँस लेने से छाती का फैलाव होता है व् सामर्थ्य में बढ़ोतरी होती है।

5. वीरभद्रासन |Veerabhadrasana
वीरभद्रासन शरीर में संतुलन को बेहतर करता है व् सामर्थ्य बढ़ाता है।यह तनाव को कम करने व् मन को शांत करने के साथ साथ हृदय गति को भी नियंत्रित करता है।

6. उत्कटासन|Utkatasana
इस मुद्रा में आपको स्वसन व् ह्रदय गति में बढ़ोतरी महसूस होगी। इससे ऊष्मा व् शक्ति मिलती है।

7.मार्जारीआसन|Marjariasana
यह मुद्रा कुर्सी आसन के बाद बेहद आरामदायक प्रतीत होती है क्योंकि इससे हृदयगति फिर से सामान्य व् लयबद्ध हो जाती है।

8. अधोमुखोस्वानआसन |Adho Mukho Svanasana
यह मुद्रा विश्राम के लिए उपयोग में लाई जाती है जिससे तंत्रिकाओं को शांति व् ऊर्जा मिलती है।

9. भुजंगासन|Bhujangasana
यह मुद्रा छाती के फैलाव को बढ़ाती है और इसमें सालम्ब भुजंगासन की तुलना में अधिक शक्ति व् सामर्थ्य की जरुरत होती है।

10. धनुरासन|Dhanurasana
पूरे शरीर को गहरा खिंचाव प्रदान करने वाला धनुरासन हृदय क्षेत्र को मजबूती देता है।

11. सेतुबंधासन |Setu Bandhasana
धनुरासन कि तुलना में यह मुद्रा आसान होती है। सेतुबंधआसन गहरी साँस लेने में मदद करता है, छाती के हिस्से में फैलाव व् रक्त संचार को बढ़ाता है।

12. सालंब सर्वांगासन |Salamba Sarvangasana
कंधो के सहारे खड़े होने पर यह परानुकमपी तन्त्रिका तन्त्र को उतेजित करता है और छातीमें फैलाव लाता है।विश्राम देने के साथ साथ यह मुद्रा ऊर्जावान भी बनाती है।

13. अर्धमत्सेन्द्रासन|Ardha Matsyendrasana
बैठे हुए रीढ़ को आधा मोड़ना पूरे मेरुदंड के लिए काफी लाभदायक है| इससे छाती में फैलाव उत्पन्न होता है।

14.पश्चिमोतानासन| Paschimottanasana
बैठकर आगे की ओर झुकने से सिर ह्रदय से नीचे आ जाता है, जिससे हृदयगति व् स्वसनगति में कमी आने से विश्राम मिलता है।

15. दंडासन |Dandasana
उपरोक्त सभी मुद्राओं के विपरीत इस मुद्रा में पीठ को मजबूती मिलती है व् कन्धों और छाती को फैलाव मिलता है।

16. अर्धपिंचमयूरासन|Dolphin pose
यह अधो मुखो स्वान आसन से अधिक कठिन है ।इससे सामर्थ्य में बढ़ोतरी होती है व् शरीर के ऊपरी भाग को मजबूती मिलती है ताकि हृदय को लाभ पहुचानेवाली मुद्राएँ की जा सके।

17. मकर अधोमुखशवासन |Dolphin Plank pose
मकर अधो मुखशवासन से हृदय की पम्पिंग नियमित होती है।

18. सालंब भुजंगासन |Sphinx pose
इसमें रीढ़ की हड्डी थोड़ी से मुड़ती है जिससे छाती खुलती है व् फेफड़ों और कन्धों में खिंचाव होता है।

19. शवासन |Shavasana
सभी योग मुद्राओं के बाद शवासन से गहरा विश्राम मिलता है| इससे शरीर व् स्वांस में सूक्ष्म परिवर्तन आते हैं जो पूर्ण स्वास्थय के लिए बेहद जरूरी है।

20. अंजुली मुद्रा |Anjali Mudra
यह मुद्रा हृदय को खोलने, मस्तिष्क को शांत रखने के साथ ही तनाव व् व्याकुलता को कम करती है।
यह शरीर को प्राणायाम व् ध्यान के लिए बेहतर तैयार करती है।

Surya namaskar benefits

SURYA NAMASKAR & IT's BENEFITS

Without Sun, there will be no life on Earth. Surya Namaskar or Sun Salutation is a gesture of gratitude to the Sun – which is the reason of alllife force on our planet. Surya Namaskar is a set of 12 fixed cyclic movements (asanas), which bring body, breath and mind together – a stepping stone that can help you go deep in meditation.Surya Namaskar postures act as a nice link between warm-ups and asanas and can be done any time when you have an empty stomach. However, morning is considered to be the best time for Surya Namaskar as it revitalizes the body and refreshes the mind, making us ready to takeon all tasks of the day. If done in the afternoon, it energizes the body instantly and if done at dusk, it helps you unwind. When done at a fast pace, Surya Namaskar is an excellent cardiovascular workout and a good way to lose weight.

Why Start the Day With Surya Namaskar?
Surya Namaskar postures are energizing, meditative and relaxing. They also make the body flexible and improve blood circulation. A better bloodcirculation helps in prevention of hair greying, hair fall and dandruff, and also improves overall hair growth. The vital internal organs also become more functional with better blood circulation. It also benefits our skeletaland digestive system, while balancing body’s tri-doshas – Vata, Pitta and Kapha.

Why Should Children Do Surya Namaskar?
Surya Namaskar calms the mind and helps improves concentration. Today, children face a cut-throat competition and should adopt Surya Namaskar in their daily schedule as it boosts endurance power and reduces the feeling of anxiety and restlessness, especially during exams. Regular practice of Surya Namaskar gives strength and vitality to the body. For future athletes it is the best workout to strengthen muscles and it also improves flexibility in spine and in limbs. Children as young as 5-year-olds can start doing Surya Namaskar daily.

Why Should Women Do Surya Namaskar?
It is said that Surya Namaskar can do what months of dieting cannot. Hence, it’s a blessing for health-conscious women as it not only helps lose extra calories, but it offers an easy and inexpensive way to be in proper shape by stretching the abdominal muscles naturally. Some of the Sun Salutation poses help lose extra fat on belly by stimulating sluggish glands like the thyroid gland (which has a big effect on our weight) to increase hormonal secretions. Regularly practicing Surya Namaskar can regulate irregular menstrual cycles among women and also ensure an easy childbirth. Last but not the least; it helps in bringing back the glow on your face, preventing onset of wrinkles and making it ageless and radiant.

Develop Your Sixth Sense
With Sun Salutation Our ancient rishis said that different Gods govern different organs of our body. The navel or solar plexus is said to be connected with the sun and that’s the reason why yogis recommend Surya Namaskar practice in the morning when Vitamin D-enriched sunrays fall on the solar plexus. With a regular practice of Surya Namaskar and meditation, the solar plexus increases from the size of an almond to the size of a palm. This expansion of solar plexus, also known as the second brain, develops our intuitive ability and makes us more clear and focussed. The contraction of the solar plexus, on the other hand, leads to depression and other negative tendencies.

The manifold benefits of Surya Namaskar help keep the body healthy and the mind calm. Thus, a regular practice of Surya Namaskar is highly recommended by all yoga experts. These Surya Namaskar tips can also help improve your practice and give better results.Yoga practice helps develop the body and mind bringing a lot of health benefits. Part of article is taken from AoL website.

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Sun salutation

Sun salutation / Surya Namaskar is a set of 12 powerful Yoga poses. Each round consists of two sets of 12 poses each. First we do with right leg and then with left leg. We can start it with chanting :
"OM Surya Namah."

It has following 12 poses.

1. Pranam asan
Prayer pose

2. Hast utthan asan..
Raised arm pose

3. Hast pad asan
Hand to foot pose

4. Ashwa sanchalan asan
Equestrian pose

5. Dand asan
Stick pose

6. Asthang namaskar
Salute with eight points

7. Bhujang asan
Cobra pose

8. Parvat asan
Mountain pose

9. Ashwa sanchalan asan
Equestrian pose

10. Hast pad asan
Hand to foot pose

11. Hast utthan asan
Raised arm pose

12. Tad asan
Tree pose

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Meditation myths

With close to six billion minds active from moment to moment, there are endless streams of thoughts on every aspect of creation. Some thoughts perceive reality the way it is, some make up the imagination and some are simply misconceptions. While there are myths about many topics, the most popular one is meditation. Sri Sri Ravi Shankar enumerates 10 myths about the art of meditation.

Utter the word ‘meditation’ and all kinds of images and notions conjure up: Is this for me?I can’t sit for long hours?Who wants to meditate anyways?Here is a list of the most common myths, hoping that any confusion that you might have is cleared.

1) Meditation is concentration: Meditation is actually de-concentration. Concentration is a benefit of meditation. Meditation is absolute relaxation of the mind. It is letting go. When the mind is relaxed, we can concentrate better.

2) Meditation is a religious practice: Yoga and meditation are ancient practices that transcend all religions. In fact, meditation has the ability to bring religions, nations and faiths together. Just like the sun shines for everyone and the wind blows for everyone, meditation benefits everyone.

3) Sit in the lotus posture to meditate: The Patanjali yoga sutras is perhaps the most scientific and detailed study that man has produced dealing with the nature of the mind. Sthirasukhamasanam, a yoga sutra by Patanjali, explains that while meditating, it is more important to be comfortable and steady. This helps us to have a deeper experience. You can sit cross-legged, on a chair, or in a sofa. It is good to maintain a posture where the spine is erect and shoulders are relaxed.

4) Meditation is for old people: Meditation is universal and adds value to lives of people of all age groups. One can start mediating at the age of eight or nine. Just like a shower keeps the body clean, meditation is like the shower for the mind. “After practising meditation, I do not get as angry as before,” shares Sandra, a school student.“Just a few minutes of meditation keep me calm all day,” shares 19-year-old Karan, another young meditator.

5) Meditation is hypnotising yourself: Meditation is an antidote for hypnosis. In hypnotism, the person is not aware of what he or she is going through. Meditation is complete awareness of each and every moment. Hypnotism takes the person through the same impressions that are in his mind. Meditation frees us from these impressions so that our consciousness is fresh and clear. Hypnotism increases metabolic activity, meditation reduces it. In fact, those who practise pranayam and meditation regularly cannot be hypnotised easily.

6) Meditation is thought control: Thoughts do not come to us by invitation. We become aware of them only after they have arrived! They are like clouds in the sky. They come and go on their own. Trying to control thoughts involves effort and the key to a relaxed mind is effortlessness. In meditation, we do not crave for good thoughts, nor are we averse to bad thoughts. We simply witness and transcend thoughts and move into that deep inner silent space.

7) It helps escape from problem: On the contrary, meditation empowers you to face problems with a smile. Skills develop in us to handle situations in a pleasant and constructive manner through yoga and meditation. We develop the ability to accept situations as they are and take conscious action instead of brooding over the past or worrying about the future. Meditation nurtures inner strength and self-esteem. It acts like an umbrella during rainy days. Challenges will arise but we can still move ahead with confidence.

8) It’s time consuming: You do not have to sit for hours to have a deeper experience in meditation. The connection with that deep inner core of your being, your source can happen in just a fraction of a moment. Just a 20-minute session of Sahaj Samadhi meditation every morning and evening is sufficient to take you on this beautiful inward journey. As you practise, the quality of your meditation will improve gradually.

9) You will become a sanyasi: You do not have to give up material life to meditate or progress on the spiritual path. In fact, the quality of your enjoyment improves greatly as you meditate. With a relaxed and peaceful mind, you are able to live happily and make others in your surroundings happy too.

10) Meditation is time-bound: Anytime and all directions are good for meditation. Just keep in mind that your stomach should not be full; else, you may doze off. Meditating during sunrise and sunset keeps you calm and energetic throughout the day.

Source: The Pioneer

Health tips: Alkaline

Excessive intake of acidic food such as rice��, fruits��, milk��, spices ��etc will result in joint pain, lethargy, and diseases. A simple solution for this is to drink alkaline water to make the pH level of your blood normal. Add four cut pieces of cucumber and two small pieces of lemon�� into 1 litre of water and leave it overnight to make it alkaline. Drink this alkaline water two hours before food or three hours after food for a healthier body and mind.��

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Of course you may join Group Yoga session. Monthly charges for group session are just Rs.500. Above fees may change in future anytime. So do confirm through message or call.

Mudras

Surya mudra.... Very good for reducing cholesterol and weight.

Pictures :Relax

Relaxation is as much important as asan/pose in yoga.

Your Yoga instructor.

Our Yoga instructor,  Anurag Sharma is certified yoga instructor. He is practicing yoga and meditation regularly since 2001. He has learned yoga & meditation from various organizations including Art of living, Chandigarh college of yoga, Osho, Isha &  Vipasna Institute.

He is teaching yoga since 2011. He has taught yoga and meditation at various schools, colleges &  hospitals of Chandigarh, Mohali and Kharar including PGI drug & alcohol de addiction center.

He has also worked with Chandigarh Administration as Master Yoga Trainer for preparing participants for 2nd & 3rd International Yoga day at Capital complex with PM Modi and at sector 17 Plaza respectively, Chandigarh. Presently he is taking regular group and individual sessions at Kharar and nearby.

Apart from that we have also other male and female yoga trainers with us for conducting home or group sessions in different areas especially for Mohali, Panchkula and Chandigarh in Punjab and other parts of India and world.

Pictures : Yoga session at Green belt, 47 sector, Chandigarh.

Our Yoga session going on in green belt. Participants are in Tree pose, very good asan for balance of both mind and body.

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